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फिर क्या होगा उसके बाद

February 29, 2012

 बालकृष्ण राव

फिर क्या होगा उसके बाद?
उत्सुक हो कर शिशु ने पूछा
माँ, क्या होगा उसके बाद ?

‘रवि से उज्ज्वल शशि से सुंदर
नव किसलयदल से कोमलतर
वधू तुम्हारी घर आएगी
उस विवाह उत्सव के बाद ‘

पल भर मुख पर स्मित की रेखा
खेल गयी, फिर माँ ने देखा
कर गंभीर मुखाकृति शिशु ने
फिर पूछा ‘क्या उसके बाद?’

फिर नभ के नक्षत्र मनोहर
स्वर्ग लोक से उतर – उतरकर
तेरे शिशु बनने को , मेरे
घर आयेंगे उसके बाद |’

‘मेरे नए खिलौने लेकर
चले न जाएँ वे अपने घर |’
चिंतित हो कह उठा  किन्तु फिर
पूछा शिशु ने, ‘उसके बाद?’

अब माँ का जी उब चुका था
हष-श्रांति में डूब चुका था
बोली, ‘ फिर मैं बूढ़ी होकर
मर जाऊँगी उसके बाद’

यह सुन कर भर आये लोचन ,
किन्तु पोंछ कर उन्हें उसी क्षण,
सहज कौतूहल से फिर शिशु ने
पूछा,  ‘माँ क्या उसके बाद?’

कवि को बालक ने सिखलाया,
सुख दुःख हैं पल भर की माया,
है अनंत का तत्व प्रश्न यह,
‘फिर क्या होगा उसके बाद?’

~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

This thought provoking poem reveals both a child’s curiosity as well as the eternal truth of the transient nature of life and the happiness it offers. The poem is a conversation between a mother and her child. The poet who is a witness to the conversation leaves with  a feeling that both happiness and sadness are momentary and the question ‘what will happen hereafter’ is a question that can not be answered till infinity.

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# Image sourced from http://wengyuen.files.wordpress.com/
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